आज परछाई से पूछ ही लिया क्यों चलती हो, मेरे साथ ….. उसने भी हँसके कहा, दूसरा और कौन है तेरे साथ
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ज़हर से ज्यादा खतरनाक है ये मोहब्बत…. जरा सा कोई चख ले मर – मर के जीता है।
“फरेब था हम आशिकी समझ बैठे, मौत को अपनी ज़िंदगी समझ बैठे, वक़्त का मज़ाक था या बदनसीबी, उनकी दोस्ती Continue Reading..
* मोहब्बत का नतीजा, दुनिया में हमने बुरा देखा, जिन्हे दावा था वफ़ा का, उन्हें भी हमने बेवफा देखा.
Kisi se itna attach mat hona..
सुनो ना….हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
एक सवेरा था जब हंस कर उठते थे हम और आज कई बार बिना मुस्कराये ही शाम हो जाती है
आशियाने बनें bhi to kaha जनाब?? Jameene_महँगी ho चली hai aur दिल me लोग jagah नही देते।।
खुद से मिलने की भी फुरसत नहीं है अब मुझे, और वो औरो से मिलने का इलज़ाम लगा रहे है…
