वो रोटी चुरा के चोर हो गया. . . लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते.
~Jab Tak Ziinda Hoon Mere Hoke Jee’Lo, Kuch Hi Diin Ki Baat Haii Phiir Jo Chahe Kar Lena .. ‘
चुप रहना ही बेहतर है, जमाने के हिसाब से ! धोखा खा जाते है, अक्सर ज्यादा बोलने वाले !!
मोहब्बत थी, तो चाँद अच्छा था..! उतर गई, तो दाग भी दिखने लगे..
मुझ पर इलज़ाम झूठा है…. _यारों…_ मोहब्बत की नहीं..हो गयी थी….!!
उदास रहता है मोहल्ले मै बारिश का पानी आजकल, सुना है कागज़ की नाव बनानेवाले बड़े हो गए है!
माँ ने रख दी आखिरी रोटी भी मेरी थाली में मै पागल फिर भी खुदा की तलाश करता हूँ !
नींद छीन रखी है उसकी यादों ने, गिला उसकी दूरी से करें या अपनी चाहत से !!
~Khushiya Toh Taqdeer Meiin Honi Chahiye, Tasver Meiin Toh Har Koi Muskurata Haii .. ‘
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