इक तो नहीं सजन मेरे पास नही रे… दूजे मिलन दी कोई आस नही ऱे….
मोह्हब्ब्त किसी से तब ही करना जब निभाना सिखलो .. मजबूरियों का सहारा लेकर छोड़ देना वफादारी नही होती.
कितनी रौनकें कितने मंजर, न जाने कितने शहर देखे, पर… गाँव हमें अब भी वहीं प्यारा है, जहाँ हमने अपने Continue Reading..
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
इतना सितम से पहले सोचा भी नहीं उसने, मैं सिर्फ दीवाना नहीं.. इंसान भी था
थोड़ी सी उम्र में हमने, घूम जनाज़ा देखा। ऊपर से तो मीठी बोली, नस नस में बेईमाना देखा।
मेला लग जायेगा उस दिन शमशान मे, जिस दिन मे चला जाँऊगा आसमान मे
शौक से बदल जाओ तुम मगर ये ज़हन मैं रखना की…… हम जो बदल गये तो तुम करवटें बदलते रह Continue Reading..
मै नही जानता मै क्यो लिखता हूँ, बस ये खाली कागज मुझसे देखे नही जाते
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *