आदमी कभी भी इतना झूठा नही होता … अगर औरते इतने सवाल न करती
मुझ पर इलज़ाम झूठा है…. _यारों…_ मोहब्बत की नहीं..हो गयी थी….!!
Bematlab ki duniya ka kissa hi khatm, Ab jis tarah ki duniya us tarah ke hum
हमसे मोहब्बत का दिखावा न किया कर, हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है
तुम्हारे एक लम्हें पर भी मेरा हक नही ना जाने तुम किस हक़ से मेरे हर लम्हें मैं शामिल हो
*जब आप “फिक्र” में होते हो तो,खुद जलते हो… और* *आप “बेफिक्र” होते है,तो दुनिया जलती है…
-Adat Mujhe Andher’On Se Darne Ki Daal Kar, Aik Shakhs Meri Ziindagi Ko Raat Kar Gaya .. ‘
वो तो हम जैसे शायरों ने लफ़्ज़ों सेसजा रखा है… वरना मोहब्बत इतनी भी हसीं नहीँ होती…
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोह्हबत से नफ़रत हो गयी
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