एक तो सुकुन और एक तुम, कहाँ रहते हो आजकल मिलते ही नही.
लोग क़दर तभी करते हैं जब उन्हें मुँह लगाना छोड़ दो
मै और मेरा रब्ब रोज भूल जाते है वह मेरे गुनाहो को मै उसकी रहमतो को
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी, डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए।
काजल ज़रूरी है तुम्हारी आँखों को, मेरी आँखों को डूबने की हद्द पता रहती है..
मुमकिन नहीं शायद किसी को समझ पाना … बिना समझे किसी से क्या दिल लगाना
फ़िक्र तो तेरी आज भी है.. बस .. जिक्र का हक नही रहा।
~Woh Roz Jorhtah Haii Mujhe, Phiir Se Torhney Ke Liiye .. ‘
~Bari Gustakhiyan Karne Laga Hay, Ye Dil Mujh Se, Ye Jab Se Tera Huwa Hy Meri Sunta Hi Nahi .. Continue Reading..
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