वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
दाग़ तो रूह पर भी आ जाता है, जब दिलों में दिमाग़ आ जाता है
कुछ नहीँ था मेरे पास खोने को, जब से मिले हो तुम डर गया हूँ मैँ
सब मशरूफ थे नया साल मनाने में मैंने मेरी रूठी खुशियों को मना लिया..
तन्हाई की सरहदें और भीगी पलके….!! हम लुट जाते हैं, रोज तुम्हें याद करके….!
मोहब्बत में दूरियों से फर्क नहीं पड़ता मोहब्बत निभाने वाला सच्चा हो
पसंन्द आया तो दिल में , नही तो दिमाग में भी नही ।
कभी तू नाराज़ कभी मैं नाराज़.. उफ्फ ये मोहब्बत उफ्फ ये अंदाज़…😍😘
~Sard Mausam Meiin Bohat Yaad Aatey Haii, Dhund Meiin Lipte Huye Waade Unke .. ‘
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