वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
! वो अब भी आती है ख्वाबों में मेरे.. ये देखने की मैं उसे भूला तो नहीं…..!!
कहीं ज़िद पूरी, कहीं जरूरत भी अधूरी… कहीं सुगंध भी नहीं, कहीं पूरा जीवन कस्तूरी…!!
मुझे महोब्बत है तेरे मन से.. न तेरी खूबसूरती से न लिबास से..
मै तुम्हारी वो याद हूँ.. जिसे तुम अक्सर भुल जाते हो…..
लोग क़दर तभी करते हैं जब उन्हें मुँह लगाना छोड़ दो
अब तेरी याद के साथ मेरा हरपल ख़ास है, तू पास नहीं है इसलिए दिल थोडा उदास है
~Lutf’E-Muoohabbat Aur Bhe Barha Detii Haiin, Bohat Anmol Hotii Hain Raatein -December- Ki .. ‘
~Apni Narazgii Ki Koii Wajah Toh Batayii Hotii, Hum Duniiya Chor Detey Tujhe Manany Ke Liiye .. ‘
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