वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
कैसे गुजर रही है सभी पूछते तो हैं, कैसे गुजारता हूँ कोई पुछता नहीं…
काग़ज़ पे तो अदालत चलती है.. हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।
~Zyada Kuch Naii Badla Haiin Tere Mere Beech Mein, Pehle Nafrat Na Thi Ab Pyar Nahii Haii .. ‘
छोड़ना आसान होता है लेकिन भूलना नही
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलतें हैं
लोग क़दर तभी करते हैं जब उन्हें मुँह लगाना छोड़ दो
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
-Ishq Kiiya Jo Us’se Phir Usko Aazmana Kya?
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *