बहुत शख्स मिले जो समझाते थे मुझे…. काश…कोई मुझे समझने वाला भी मिलता….
बहुत जुदा है औरो से मेरे दर्द की कहानी. जख्म का कोई निशाँ नहीँ और दर्द की कोई इँतहा नही.
न जाने जिंदगी का,ये कैसा दौर है इंसान खामोश हैं और ऑनलाइन कितना शोर है…
कितनी रौनकें कितने मंजर, न जाने कितने शहर देखे, पर… गाँव हमें अब भी वहीं प्यारा है, जहाँ हमने अपने Continue Reading..
नींद तो बचपन में आती थी अब तो mobile को rest देने के लिए सो जाते हैं
कहाँ जाऊंगा तुम्हें छोड़ के •• तेरे बिना रात नही गुजरती जिंदगी क्या गुज़रेगी..
नींद उड़ा कर मेरी कहते है वो कि सो जाओ कल बात करेंगे, अब वो ही हमें समझाए कि कल Continue Reading..
” कितना मुश्किल है मनाना… उस शख्स को .. जो रूठा भी ना हो और… बात भी ना करे…!!
अब कहा जरुरत है हाथों मे पत्थर उठाने की, तोडने वाले तो जुबान से ही दिल तोड देते हैं
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