ना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन, बेहद ही करीब से गुजर कर बिछड़ गया कोई !!
तुम्हारे हर सवाल का जवाब मेरी आँखों में था और तुम मेरी जुबान खुलने का इंतज़ार करते रहे।
कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे, माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी !
जाते उसने पलटकर इतना ही कहा मुझसे मेरी बेवफाई से ही मर जाओगे या मार के जाऊँ”
Phiir Jab Meiin Uske Bina Jeenay Lagii, Usey Merii Kamii Mehsoos Honey Lagii ..
बहुत भीड़ हो गयी है तेरे दिल में, अच्छा हुआ हम वक़्त पर निकल गए
एहसान किसी का वो रखते नही मेरा भी लोटा दिया . जितना खाया था नमक मेरे जख्मोँ पर लगा दिया
-Akele Hum Hii Shamiil Nahii Haii Is Jurm Meiin ‘Jnaab Nazreiin Jab Milii Thii Muskuray Tum Bhii The .. ‘
जैसा भी हूँ अच्छा या बुरा अपने लिये हूँ, मै खुद को नहीं देखता औरो की नजर से !!
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