हमने कहाँ आज कुछ मीठा बनाओ उन्होंने ऊगली अपने होठो पर रख दी !
इत्तेफ़ाक़ से मिल जाते हो जब वो राह में कभी, यूँ लगता है करीब से ज़िन्दगी जा रही हो जैसे।
कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से… बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की
आँसू वो खामोश दुआ है जो सिर्फ़ खुदा ही सुन सकता है।
मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब… ये भी न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी Continue Reading..
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
Tum jo hoty to zindagi hum sy…. Ralkh lehjy men baat ku krti….
*तलब ये है कि…. मैं सर रखूँ तेरे सीने पे* *और तमन्ना ये कि….मेरा नाम पुकारती हों धड़कनें तेरी*
तलासी ले ले ए दोस्त मेरी तू भी अगर जेबो में मजबूरी के सिवा कुछ ओर मिले तो ये ज़िन्दगी Continue Reading..
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