हमने कहाँ आज कुछ मीठा बनाओ उन्होंने ऊगली अपने होठो पर रख दी !
तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद !
मेरे दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ “साहेब*”, *राख के नीचे ही अक्सर आग दबी होती है*…
Tark-e-Ulfat Jo Kia Hai To Sambhalo Khud Ko Kiun Mere Khawabon Me Roz Chale Ate Ho…
उड़ा भी दो रंजिशें, इन हवाओं में यारो…. छोटी सी जिंदगी हे, नफ़रत कब तक करोगे !
यूँ तो मुझे झूठ से सख्त नफरत थी, लेकिन अच्छा लगता था जब वो मुझे “जान” कहा करती थी..
-Udaas Dil Aur Nam Ankhein, Bas Yahii Miilta Haii Mohabbat Meiin .. ‘
वो मेरा हमसफर भी था वो मेरा राहगुजर भी था, मंजिलें ही एक न थीं, दरमियाँ ये फासला भी था।
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