उसने देखा ही नहीं अपनी हथेली को कभी, उसमे हलकी सी लकीर मेरी भी थी।
*फिर उड़ गयी नींद ये सोच कर……* *सरहद पर बहा वो खून मेरी नींद के लिए था…..!!
हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.
~Nahi Haii Meri Fitrat Mein Yeh Adaat, Warna Teri Tarah Badlna Mujhe Bhii Aata Haii .. ‘
Tumhe ulfat nahin mujhse mujhe nafrat nahin tumse, Ajab shikwa sa rehta hai tumhe mujhse mujhe tumse..
निगाहों से भी चोट लगती है.. जनाब.. जब कोई देख कर भी अन्देखा कर देता है..!!
तमन्ना थी सदा जिनके करीब रहने की❤ अब खुद ही उनसे बहुत दूर हुए जा रहा हूँ।
जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी, अब धुऐ पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी.
*हम तो आईना हैं, आईना ही रहेंगे फ़िक्र वो करें..!!* *जिनकी शक्लो में कुछ और और दिल में कुछ और Continue Reading..
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