वो जो मुझे हँसते हुए देख कर खुश समझते हैं , वो अभी मुझे समझे नहीं।
हमसे मोहब्बत का दिखावा न किया कर, हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है
मुझे ही लोग खो देते हैं अक्सर किसी को मैं कभी खोता नहीं हूँ
मैं भी कभी हँसता, खेलता था….!! कल एक पुरानी तस्वीर में, देखा था खुद को.
लड़कियाँ खिलौना नही होती… जनाब.. पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते हैं
मर जाने के लिए थोड़ा ज़हर काफ़ी है, मगर जीने के लिए काफ़ी ज़हर पीना पड़ता है।
उसे तो हमारी महोब्बत ने मशहूर कर दिया . बेवफा वरना तू सुर्खियो मेँ रहे तेरी इतनी औकात नही
Usne yeh soch kar mujhe Alvidaa keh diyaa… ki Gareeb logg hain Mohabbat ke sivaa Kya denge
अंदाजा लगाओ मेरी मोह्हबत का इस बात से ही. तुम्हारे नाम का हर शख्स मुझे अच्छा लगता है…!!
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