खुदा कि बंदगी कुछ अधुरी रह गयी, तभी तेरे मेरे बीच ये दूरी रह गयी.
छोड़ तो सकता हूँ मगर छोड़ नहीं पाता उसे, वो शख्स मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है.. …
सुना है आजकल तेरी मुस्कुराहट गायब हो गयी है, तू कहे तो फिर से तेरे क़रीब आ जाऊँ.
“आज का ज्ञान! लड़की और नौकरी तभी छोड़ें, जब दूसरी हांथ में हो!”
तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ … तेरा गया कुछ नहीँ और मेरा रहा कुछ नहीँ…!
किताबें भी पढ़ने का शौक़ नहीं था हमें, और इस इश्क़ ने आँखें पढ़ना सिखा दिया !!
जब भी देखती है मुझे, नज़रें झुका लेती है वो, खुदा का शुक्र है, हमें पहचान तो लेती है वो।
इतिहास गवाह है टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर, चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद Continue Reading..
हमारी तो ज़ुबान भी इतनी बात नहीं करती •• जितनी तुम्हारी आंखें करती है
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