झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है, सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं..
अजीब है इन्सान की शख़्सियत यारों, हवस ख़ुद की उठती है “तवायफ़” उसे बोलता है…
इतना सितम से पहले सोचा भी नहीं उसने, मैं सिर्फ दीवाना नहीं.. इंसान भी था
जो लम्हा साथ हैं, उसे जी भर के जी लेना. कम्बख्त ये जिंदगी.. भरोसे के काबिल नहीं है.!
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
वो इतना रोई मेरी मौत पर मुझे जगाने के लिए.. मैं मरता ही क्यूँ अगर वो थोडा रो देती मुझे Continue Reading..
mana ki Baki logo ki tarh jyda paya nhi Mene…. . . lekin Khush hu Kyu ki khud ko gira Continue Reading..
एक ही समानता है पतंग औऱ जिन्दगी मॆं.. ऊँचाई में हो तब तक ही वाह-वाह होती हैं!!
खुद के खोने का पता ही नहीं चला… , किसी को पाने की ‘इन्तहा’ कर दी मैंने….?
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