एक तो सुकुन और एक तुम, कहाँ रहते हो आजकल मिलते ही नही.
जब जरुरत के समय काम आने वाला पैसा बदल सकता है …. तो तू क्या चीज है…
अब इतना भी सादगी का ज़माना नहीं रहा …!! क़े तुम वक़्त गुज़ारो और, हम प्यार समझें,
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।
नाराजगी चाहे कितनी भी क्यो न हो तुमसे तुम्हें छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नही रखते_!!!
मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
कमाल की तक़दीर पाई होगी उस शॅक्स ने जिसने तुझसे मोहोब्बत भी ना की हो और तुझे पा लेगा..
नाम तेरा ऐसे लिख चुके है अपने वजूद पर, कि तेरे नाम का भी कोई मिल जाए….तो भी दिल धड़क Continue Reading..
कहा था ना मैने “सोच लो तुम” जिन्दगी भर रिश्ते निभाना आसान नहीं होता..
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