सब मशरूफ थे नया साल मनाने में मैंने मेरी रूठी खुशियों को मना लिया..
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
मुकाम वो चाहिए मुझे, की जिस दिन भी हारु , . उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो
फ़िक्र तो तेरी आज भी है.. बस .. जिक्र का हक नही रहा।
अगर में कहुँ उदास हु तुम बिन तो तुम लौट आओगी ना
..है एक कर्ज़ जो हरदम सवार रहता है । …वो मम्मी पापा का प्यार है जो सब पर उधार रहता Continue Reading..
मै और मेरा रब्ब रोज भूल जाते है वह मेरे गुनाहो को मै उसकी रहमतो को
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
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