पुराने आशिक वफा तलाश करते थै, आज के आशिक जगह तलाश करते है..
वो जवानी ही क्या जिसे लोग पलट कर न देँखेँ
उन्हें शिकायतों से शिकायत रहने लगी है, अब हम शिकायत जो नहीं करते!
मेरे कंधे पर कुछ यूँ गिरे तेरे आंसू, कि सस्ती सी कमीज़ अनमोल हो गयी.!!
कट रही है ज़िंदगी रोते हुए, और वो भी तुम्हारे होते हुए…
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
त्यौहारों के बहाने ही सही, रिश्ते तो घर लौट आते है…
शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है,
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
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