मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
रोकना मेरी हसरत थी, जाना उसका शौक . . . . वो शौक पूरा कर गया, मेरी हसरतेँ तोङ कर Continue Reading..
Khaak mutthi mein liye Qabar ki yeh sochta hun.!! “dost” Insan Jo Mrty Hain to”Groor Kahan Jata hai….?
हमने तो एक ही शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी .. अब मोहब्बत किसे कहते है मालूम नहीं..
दिल मे बने रहना ही सच्ची शोहरत है, वरना मशहूर तो कत्ल करके भी हुआ जा सकता है.!!
दिल मेरा भी कम खूबसूरत तो न था,⁉ मगर मरने वाले हर बार सूरत पे ही मरे !!
चलो बिखरने देते है जिंदगी को अब, सँभालने की भी तो एक हद होती है…!
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
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