मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है…. लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !!
जो बिना ठोकर खाए मजिँल तक पहुच जाते है उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते है
इतना रोई वो मेरी कब्र पे मुझे जगाने के लिए, मै मरता ही क्यो अगर वो थोड़ा रो देती, मुझे Continue Reading..
~देख जिँदगी तू हमे रुलाना छोड दे अगर हम खफा हूऐ तो तूझे छोड देँगे
ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी
~Gar Tum Jo Saath Aa Gey Hote, Ziindagi Har Tarah Se Mumkin Thi .. ‘
तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी, और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!
मेला लग जायेगा उस दिन शमशान मे, जिस दिन मे चला जाँऊगा आसमान मे
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