मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
मेरे कंधे पर कुछ यूँ गिरे तेरे आंसू, कि सस्ती सी कमीज़ अनमोल हो गयी.!!
मुंह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन , आवाज़ों के बाजारों में, ख़ामोशी पहचाने कौन Continue Reading..
~ Kaha Tha Na Ki Tum Mujhe Bhul Jaogey .. Aur Meri Es Baat Par Aksar Larah Karte Thay Tum Continue Reading..
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
~जाते वक्त उसने मुजसे अजीब सी बात कही ” तुम जिंदगी हो मेरी, और मुझे मेरी जिंदगी से नफरत है
हिसाब बराबर करने का बड़ा शौक़ रखते हो न तुम….. देखो मैंने याद किया है तुम्हें,लो अब तुम्हारी बारी।।
कर्म भूमि पे फल के लिए श्रम सबको करना पडता है रब सिर्फ लकीरेँ देता है रंग हमको भरना पडता Continue Reading..
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