मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही पहले तुजे पाने की अब तुजे भुलाने की.
ये शहर आजकल वीरान पड़ा है, सुनने में आया है कि, उनकी पायल खो गयी है।
तुमने जो दिल को छुना छोड़ दिया, लफ्जों ने खूबसूरत होना छोड़ दिया.
जो लम्हा साथ हैं, उसे जी भर के जी लेना. कम्बख्त ये जिंदगी.. भरोसे के काबिल नहीं है.!
मजबूर नही करेंगे तुझे वादे निभानें के लिए, बस एक बार आ जा, अपनी यादें वापस ले जाने के लिए..!!
je pyr bhi ajeeb h, jo ise jan le…. ye kmbkhat usi ki jaan le leta h….
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
एक तो सुकुन और एक तुम, कहाँ रहते हो आजकल मिलते ही नही.
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की… तुम्हें देखा तो लगा…एक बार और देख लू…
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