मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही पहले तुजे पाने की अब तुजे भुलाने की.
मैं मानता हूँ खुद की गलतियां भी कम नहीं रही होंगी मगर बेकसूर उन्हें भी कहना मुनासिब नहीं
अजीब है इन्सान की शख़्सियत यारों, हवस ख़ुद की उठती है “तवायफ़” उसे बोलता है…
~Kuch Samaj Nahii Aatii Sheher Ke Logo’n Kii .. Yun’Hii Rooth Jate Haii Aayina Dikhane Par .. ^
इक बात बेखौफ मुझसे कहता है आईना , कभी आदमी अच्छे हुआ करते थे तुम भी …..
बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसें, गर मुझे उनकी याद आ गई, तो मुकाबला बराबरी का होगा…
Thak gaya hun main dard chhupate chhupate, Aur log kehte hain main muskurata bahut hun
ऐ दिल थोड़ी सी हिम्मत कर ना यार, चल दोनों मिल कर उसे भूल जाते है।
~अब भी रोज तुम्हारे स्टेट्स पर एक नजर मार लेता हूं,, ये सोच कर शायद तुमने मेरे बारे में भी Continue Reading..
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