तकलीफ कि इन्तेहा तो तब है, जब लोग जिंदा रहे और रिश्ते मर जाये…
क्या बयां करूँ कि लब अब खामोश रहते हैं, जुदा होकर उनसे हम अधूरे से लगते हैं
Kasam Kha Chukii Hoon Tujh Ko Na Chorne Ki, Warna Mehsoos Kab Sey Ho Rahii Haii Teri Be’Rukhii Musalsal ..
एक तरफ आँखें है जिनमें नीदें भरी है… दूजी पलकें है जो इंतजार की जिद पे अडी है
दर्द तो ऐसे पीछे पड़ा है मेरे,* *जैसे मैं उसकी पहली मोहब्बत हूँ !!*
Uffff Tera Aksar Bhool Jana MujhKo ” Agar Dil Na Diya Hota To Teri Jan Le Lete.
जिन्दगी भर कोई साथ नहीं देता यह जान लिया हमने लोग तो तब याद करते हैं जुब वह खुद अकेले Continue Reading..
शायद हम ने जिंदगी की कीमत को जाना ही नहीं, वरना किसी के लिए खुद को बर्बाद नहीं करते..
जिधर देखो, उधर मिल जायेंगे, अखबार नफरत के बहुत दिन से, मोहब्बत का न देखा, एक खत यारों
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