हम एक दिन महरूफ़ क्या हुए, जनाब ने तोहमत लगा दी खुद को भूल जाने की.
मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
सांसों के सिलसिले को ना दो ज़िन्दगी का नाम, जीने के बावजूद भी मर जाते हैं कुछ लोग !!
जब तक आप अपने अतीत को याद करते रहेगे तब तक आप भविष्य की योजनाएँ नही बना पाएगे
आज परछाई से पूछ ही लिया क्यों चलती हो मेरे साथ… उसने भी हँस के कहा….दूसरा कौन है तेरे साथ
वफ़ा का तो वजूद ही नहीँ रहा यारो किस्से भी उन्ही के हैं जो बेवफा हैं।
वक्त सिखा देता है इंसान को फलसफा जिंदगी का..!! फिर तो नसीब क्या .. लकीर क्या … और तकदीर क्या Continue Reading..
Abi Tak Yaad Kr Rahy Ho ____ Pagal Ho Tum Qasam Sey. Us Ne To Tere Bad B Hazaron Bhula Continue Reading..
क्या पता था कि महोब्बत हो जायेगी,.?..हमे हमें तो बस तेरा? मुस्कुराना अच्छा लगा था.
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