हम एक दिन महरूफ़ क्या हुए, जनाब ने तोहमत लगा दी खुद को भूल जाने की.
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर…
दिल तो चाहता हैं में भी किसी से प्यार करू पर मेरी तनख्वा बहोत कम है जनाब
HUM to tere hi rahe 1 jheel ke pani ki tarah AGAR drya bnte to bohat door nikal skte the!!
Bewafaa Waqat Thaa Tum They Yaa Muqadar Mera? Baat Itni Hi Hai Ke Anjaam Judai Nikla…!!!
जनवरी से तुम्हें खुशियाँ मिली क्या यारो, मैं तो अब भी तन्हा हूँ दिसंबर की तरह !!
हिसाब बराबर करने का बड़ा शौक़ रखते हो न तुम….. देखो मैंने याद किया है तुम्हें,लो अब तुम्हारी बारी।।
जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे, और दफनाने वाले भी अपने थे.
जुबां कह न पाई मगर,आँखे बोलती ही रही, कि मुझे सांसो से पहले तेरी जरूरत है.
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