कितनी मासूम सी है ख्वाहिस आज मेरी कि नाम अपना तेरी आवाज़ से सुनूँ !!!
नाराज़गी बहुत है हम दोनों के दरमियान … वो गलत कहता है कि कोई रिश्ता नहीं रहा
चलो मान लेता हुँ कि मुझे महोब्बत करनी नही आती . पर यह तो बता तुझे दिल तोडना किसने सिखाया
बहुत देर तक मेरे साथ रहा करती है…. ये जो ख़ामोशी है न तेरी…. बहुत कुछ कहा करती है….!!
शब्द “दिल” से निकलते हैं… “दिमाग”से तो उसके मतलब निकलते हैं…
यूँ तो शिकायते आप से सैंकड़ों हैं मगर.. आप एक मुस्कान ही काफी है मनाने के लिये।
पता नहीं कैसे उसने मुझे छोड़ दिया, वो तो कमीनी…किसी के 5 रू. भी नहीं छोड़ती थी.
मैं तो दिल को साफ रखा करता था हमें क्या पता कि कीमत तो चेहरे की होती हैं
जिस मोङ पे हमको छोङ गये, हम बैठे अब तक सोच रहे क्या भुल हुई क्यो जुदा हुए, बस यह Continue Reading..
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