Muhabbat kesi bhi h0 Sahib…! Sajda kerna sikha deti hai…!
मर जाने के लिए थोड़ा ज़हर काफ़ी है, मगर जीने के लिए काफ़ी ज़हर पीना पड़ता है।
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
जिँन्दगी मे इतनी शिद्दत से निभाना अपना किरदार . के परदा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहे
तू मुझे भुलाने की कोशिश तो कर, पल पल याद आऊँगी खुशबू की तरह
बाहुबली की हत्या देखकर भयभीत हुआ बालक… बोला… ‘छुट्टियों में नहीं जाऊंगा मामा के घर’
जुबान का वजन बहुत कम होता है लेकिन इसको बहुत कम लोग ही संभाल पाते है
तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
उसके चले जाने के बाद हम महोबत नहीं करते किसी से, छोटी सी जिन्दगी है किस किस को अजमाते रहेंगे|
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