-Koii Toh Aiisa Ho Jo Siirf Mera Ho .. ‘
अब इतना भी सादगी का ज़माना नहीं रहा …!! क़े तुम वक़्त गुज़ारो और, हम प्यार समझें,
समझ नहीं पाता उसकी आँखों की अदा, कभी लगता चाहत है, कभी लगता नफरत है..!!
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलतें हैं
तेरा नाम था आज किसी अजनबी की जुबान पे… बात तो जरा सी थी पर दिल ने बुरा मान लिया…
दुश्मनी जम कर करो लेकिन इतनी गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिंदा कोई न हो..
अब तेरे बाद ……मेरा कौन बनेगा ….हमदर्द …..* मैंने अपने भी खो दिए…. तुझे पाने की….. ज़िद में…….*
काम ऐसा करो की नाम हो जाए । या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए ।।।
मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला।। तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।
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