~Umar Bhar Rahugi Gulam Haii Koi Jo Us Sa Mila De .. ‘
Taqlik Kaniat Ki Yeh Reet Bari Nirali Hai.. Jo Ho Na Sake Apna Acha Bhi Wohi Lagta Hai..?
बहुत अकेला कर दिया है मेरे अपनो ने मुझे, समझ नहीं आता कि मैं बुरा हूँ या मेरी किस्मत.
मोहब्बत में हमेशा अपने आप को बादशाह समझा हमने मगर एहसास तब हुआ जब किसी को माँगा फकीरों की तरह
दो हिस्सों में बंट गए है, मेरे दिल के तमाम अरमान… कुछ तुझे पाने निकले, तो कुछ मुझे समझाने निकले….
अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा दो, कोई शिकायत होगी भी तो कह नहीं पाउँगा..!!
नाराज़गी बहुत है हम दोनों के दरमियान … वो गलत कहता है कि कोई रिश्ता नहीं रहा
तोड़ दिये मैंने घर के सारे ही आईने, क्यूंकि इश्क में हारे हुए लोग मुझे बिल्कुल पसंद नहीं ।।
Aa Rahi Hai Fiza Main Dheemi Dheemi Si Mehak Lgta Hai Wo Meri Yad Main Sans Le Raha Hai..
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