आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालोँ के लिए सबसे बडी सजा है
कीमत क्या हैं हमारी, उसे मालूम नहीं , उसकी ख्वाहिश है कि हम मुफ्त में हासिल हो जायें।|
जमाना करता है कि हम बुरे.. or हम कहते हैं कि abhi तो हम सुदरे है…..!!!
ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर ? तलाश हमसे शुरू होकर हम पे ही ख़त्म हो जाएगी
आँधियाँ गम की चलेगी तो भी सँवर जाऊँगा , मैं तो दरिया हूँ समुद्र में भी उतर जाऊँगा
ये मँज़िले बड़ी जिद्दी होती हैँ… हासिल कहाँ नसीब से होती हैं… मगर वहाँ तूफान भी हार जाते है… जहाँ Continue Reading..
औक़ात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके, कबख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ़्त में नीलाम हो गए..
जब दुश्मनी में मज़ा आने लगता है तो ….. साले दुश्मन माफी मांगने लग जाते है
मैं उसका हूँ ये तो सारी दुनिया जान चुकी है, वो किसकी है ये सवाल मुझे सोने नही देता ॥
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