-Jab Meiin Kuch Bhii Nahii Sochtii Tab Bhii Meiin Tumhe Sochtii Hoon .. ‘
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
रोज़ ख्वाबों में जीता हूँ वो ज़िन्दगी … जो तेरे साथ मैंने हक़ीक़त में सोची थी
इत्तेफ़ाक़ से मिल जाते हो जब वो राह में कभी, यूँ लगता है करीब से ज़िन्दगी जा रही हो जैसे।
ज़िन्दगी में अपनापन तो हर कोई दिखाता है, पर अपना है कौन ये वक़्त बतलाता है।
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें, तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले…..!!!
~Bare Sukoon Se Rukhsat To Kar Dia Us Ko, Phir Us K Baad, Muhabbat Ne Inteha Kar Di ..^
Taseer e mohabat kis ko kehte hain.. Tera majboor kar dena mera majboor ho jana
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *