जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
छोडना पडा उन्हे इतनी मोहब्बत कर के भी, मैंने ‘उन्से’ प्यार किया था, उन्के बदलते हूए ‘चेहरो’ से नहीं….
Mohabbat Seekh Li Haii Usne, Ab Jis Se Bhii Karega Kamaal Ki Karega ..
~Woh Bhool Jayega Is Tarah .. Yaqeen Jano Yaqeen Nahii Aata .. ^
तलब करे तो मैं अपनी आँखें भी उन्हें देदू, मगर ये लोग मेरी आँखों के ख्वाब मांगते हैं.
Dil kO teri chahat pe bharOsa bhi bOht hai Or tum se bichar jany ka darr bhi nhi jata
तुम चलो तो ये ज़मीं साथ दे ये आसमान साथ दे हम चले तो साया भी साथ ना दे
इतनी बेरुखी ना करो कुछ तो रहम करो, तुम पर मरते हैँ तो क्या मार ही डालोगे…
समझ नहीं पाता उसकी आँखों की अदा, कभी लगता चाहत है, कभी लगता नफरत है..!!
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