मुझ पर इलज़ाम झूठा है…. _यारों…_ मोहब्बत की नहीं..हो गयी थी….!!
वो लफ्ज कहां से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें….!! मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से……!!
जुबां तीखी हो तो खंजर से गहरा जख्म देती है, और मीठी हो तो वैसे ही कत्ल कर देती है.
दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं….!!
साझेदारी करो तो किसी के दर्द के साथ, क्योंकि खुशियों के दावेदार तो बहुत हैं।
जिसको मुझ पर भरोसा नहीं है, उसकी मेरी जिंदगी में कोई जरुरत नहीं है !!
भुलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता,.. मैंने नहीं मेरे दिल ने चुना है तुम्हे
तुम्हे क्या पता की किस दर्द में हूँ मैं, जो कभी लिया ही नहीं उस कर्ज में हूँ मैं
मौत को देखा तो नही पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी, कम्बख्त जो भी उस्से मिलता है जीना छोड देता Continue Reading..
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