हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर…
~ Badaltey Mausam Aur Badaltey Log Boht Takleef Detey Haii .. ‘
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
Mohabbat Na Thii Toh Bataya Toh Hota, Bechara Dil Tumharii Khamoshii Ko Ishq Samjh Baiitha ..
लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार भी तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो, अखबार भी तुम्हारा है..!!
वो दुआएं काश मैने दीवारों से मांगी होती, ऐ खुदा.. सुना है कि उनके तो कान होते है!!
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
-Ab Rakhna Mera Khayal Umer Bhar K Liiye, Maine Thama Haii Tumhara Hath Bary Maan K Saath .. ‘
कमाल करते है हमसे जलन रखने वाले, महफिले खुदकी सजाते है और चर्चे हमारे करते है
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