-Qafiila Khushbuon Ka Guzra Haii Tum Kahin Aas Paas Ho Shayad .. ‘
काम ऐसा करो की नाम हो जाए । या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए ।।।
सच के रास्ते पे चलने का.. ये फ़ायदा हुआ, रास्ते में कहीं भीड़ नहीं थी ।
आज तो हम खूब रुलायेंगे उन्हें, सुना है उसे रोते हुए लिपट जाने की आदत है!
एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया.. मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।
ये सोच के नज़रें मिलाता ही नहीं कि आँखें कहीं ज़ज्बात का इज़हार न कर दें :))
Aa Rahi Hai Fiza Main Dheemi Dheemi Si Mehak Lgta Hai Wo Meri Yad Main Sans Le Raha Hai..
वो सामने आये तो अज़ब तमाशा हुआ; हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।
जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
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