-Ek Muddat Se Waqt Khamosh Tha Aaj, Lamhe Fir Yoon Hi Kuch Kehne Lage .. ‘
मर जाने के लिए थोड़ा ज़हर काफ़ी है, मगर जीने के लिए काफ़ी ज़हर पीना पड़ता है।
वो सामने आये तो अज़ब तमाशा हुआ; हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों…… ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही – v
Na Garz Kisi Se Na Wasta, Mujhe Kaam Hai Apne Kaam Se Tere Zikr Se, Teri Fiker Se , Teri Continue Reading..
जाते-जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर ना दोहरा पाऊ ऐसी कहानी दे गया।
जनाजा भारी था उस गरीब का क्यूंकी, वो अपने सारे अरमान साथ लिए जा रहा था
सुनो आज आखरी बार अपनी बाँहों में सुला लो . अगर आँख खुले तो उठा देना , वरना सुबह हमे Continue Reading..
ना कर शक मेरी मोहब्बत पर ऐ पगली…. . अगर सबूत देने पर आया तो तू बदना हो जायेगी…
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