Fakar ye h ki tum mere ho!! Fikar ye hai pta nhi kab tak!!
मुझे अपने दर्द की परवाह नही भगवान करे तू हमेसा खुश रहे
असल मे वही जीवन की चाल समझता है जो सफर की धुल को भी गुलाल समझता है
सूखे होठोँ से ही होती है मीठी बाते प्यास बुझ जाए तो अलफाज और इंसान दोनो बदल जाते है
नही हो सकती ये महौब्बत तेरे सिवा किसी और से… बस इतनी सी ही बात है…समजते क्यों नही..
काश मेरा घर तेरे घर के करीब होता, बात करना ना सही, देखना तो नसीब होता
जब दो लोगों के बीच तीसरा इंसान आ जाता है…. तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती हैं !!!!
मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _ और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी..! –
मंजिलो पर जाकर साथ छोडते तो कोई बात न थी गुमराह कर गया मुझे तेरा यूँ बीच राह में छोड Continue Reading..
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