बहुत भीड़ हो गयी है तेरे दिल में, अच्छा हुआ हम वक़्त पर निकल गए
कोई नहीं बचाकर रखना चाहता है यादें जान से प्यारे खत बेरुखी से जलने लगे हैं !!
*खुद बीमार होकर भी पूछती है तबीयत मेरी…* *माँ कमजोर है थोड़ी लेकिन मजबूत बड़ी है
लफ्ज़ पहचान बने मेरी तो बेहतर है..!! चेहरे का क्या है, साथ ही चला जाएगा एक दिन
सच के रास्ते पे चलने का.. ये फ़ायदा हुआ, रास्ते में कहीं भीड़ नहीं थी ।
तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो.! मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है.!
-Aap Khud Hi Apnii AdaaO Pe Zara Gaur Kijiye, Hum Araz Krengey Toh Shikayat Hogi .. ‘
मेरी हर एक अदा में छुपी थी मेरी तमन्ना, तुम महसूस ना कर सके ये और बात है…
ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है एक दिन ठुकराएगी…!!! . . मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…!!!
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