Dil bhi gustakh ho chala tha mera.. Shukar he aap be wafaa niklay..
कुछ फैसलो का क्या बताये हाल । दूसरो की ख़ुशी की कीमत अपने आंसुओ से चुकानी पड़ती है ।
दश्त था, सेहरा था, तन्हाई थी, वीरानी थी, अपने ही अपने नही थे…बस यही हैरानी थी.
आज भी प्यारी है मुझे तेरी हर निशानी .. फिर चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखो का पानी।
जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
तू रूठा रूठा सा लगता है कोई तरकीब बता मनाने की मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा तू क़ीमत बता मुस्कुराने Continue Reading..
तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा ग़ालिब.. चाँद कहता रह गया, मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ
गुनाह नहीं होगा तेरे नाम के साथ अपना नाम जोड़ना,,, बस डर ये है कि तुझे कोई बदनाम ना करे……
तुम्हारे एक लम्हें पर भी मेरा हक नही ना जाने तुम किस हक़ से मेरे हर लम्हें मैं शामिल हो
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