~ Meri Zindagii Ke Taliban Ho Tum Be’Maqsad Tabahi Macha Rakhii Haii ..’
यहाँ मेरा कोई अपना नहीं है….. . …..चलो अच्छा है कुछ ख़तरा नहीं है !!
अभी गुमनाम हूँ तो फासला बना रखा है, कल.. मशहूर हो जाऊं तो कोई रिश्ता मत निकाल लेना !
तमननाओ की महफिल तो हर कोई सजाता है पर . पुरी उसी की होती जो तकदीर लेकर आता है
Ehsas badal jate hain bas aur kuch nahi, Warna mohabbat aur nafrat ek hi dil se hoti hai.
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
कसूर तो बहुत किए हमने जिंदगी में❣ सजा वहां मिली❣ जहां हम बेकसूर थे
मत किया कर ऐ दिल किसी से मोहब्बत इतनी.. जो लोग बात नहीं करते वो प्यार क्या करेंगे…!!”
रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है, कि लोग झुकना पसंद नहीं करते.
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