जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
-Ghar Mera Kash Tere Ghar Kay Barabar Hota, Tu Na Aata Terii Aawaz To Aya Kartii .. ‘
बिछड़ों को मिलाते मिलाते न जाने किसकी नज़र लग गयी, की आज हमें मिलाने वाला कोई नहीं है।
कुछ खूबसूरत पलों की महक सी हैं तेरी यादें, सुकून ये भी है कि ये कभी मुरझाती नही..
थोड़ी सी उम्र में हमने, घूम जनाज़ा देखा। ऊपर से तो मीठी बोली, नस नस में बेईमाना देखा।
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने, फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए..!
Us Ke Ik Ik Lamhe Ki Hifazat Karna, AY KHUDA Masoom Saa Chehra Hai Udaas Ho To Achaa Nhi Lagta…!!!
सुनो एक अजीब सी चुभन होती है..!! जब मेरे सिवा कोई तुम्हारा नाम लेता है.
बस खयालात की ही तो बात हे ,, वरना ये महोब्बत और नफरत एक ही दिल से होता है !!
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