-Mujhey Ab Farq Nahi Parta , Tumhare Badal Janey Sey .. ‘
~Apni Narazgii Ki Koii Wajah Toh Batayii Hotii, Hum Duniiya Chor Detey Tujhe Manany Ke Liiye .. ‘
लोग गलतियां कर के बदनामी से बच गये…. मैं चंद ख्वाब देख के भी गुनहगार हो गया.
जो भी आता हे समजा के चला जाता हे………. पर कोई समझने वाला नही मिलता
तुम्हे क्या पता की किस दर्द में हूँ मैं, जो कभी लिया ही नहीं उस कर्ज में हूँ मैं
जाने कब आँख लगी, यादों के दीये जलते रहे, रोशनी घुलती रही, ख्वाबों में तेरी महक आई है !
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
Yeh Kurbatein To Bohat Imtihan Leti Hain, Kisi Se Waasta Rakhna To Door Ka Rakhna.
छोड़ तो सकता हूँ मगर छोड़ नहीं पाता उसे, वो शख्स मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है.. …
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