बहुत भीड़ हो गयी है तेरे दिल में, अच्छा हुआ हम वक़्त पर निकल गए
बड़ी बारीक़ी से पढ़ लेते है वो ख़ामोशी मेरी, बार बार यू मुझे अपना बनाना उन्हें बख़ूबी आता है।।
तेरे चेहरे पे ये शिकन हमें मंजूर नही…!!! . . सुनों तुम खुश रहा करो मैं रहूँ न रहूँ…!!
Yeh Jo Tum Ho Tum Hii Bakii Ho Mujh Meiin, Kay Woh Jo Hum Thay Mar Gaey Tum Pey ..
पढ़ रहा हुं मैं इश्क की किताब अगर बन गया वकील तो , बेवफओं की खैर नही…।
यूं तो लग जाती है बद्दुआ भी किसी की, वक्त रहते दुआ मांग कर देखिए जरा
Diye hain zindagi ne zakhm aese, . Ke jin ka waqt bhi marham nahin hai “
दोनों साथ गये हैं वक्त बिताने डिनर पर.. बातें मगर उनसे.. मोबाइल कर रहा है!
Main nai chahta khuda k zindgi 100 saal ki de, Thodhi hi sahi par…….. jo bhi de kamaal ki de
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