~Kabhii Aaye Ga Use Bhi Mera Khayal, Shayad Yeh Bhi Mera Khayal Hy .. ‘
Kasam Kha Chukii Hoon Tujh Ko Na Chorne Ki, Warna Mehsoos Kab Sey Ho Rahii Haii Teri Be’Rukhii Musalsal ..
सारी उम्र जिस घर को सजाने में गुजार दी , उस घर में मेरे नाम की तख्ती तलक नहीं !
हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला, होश तब आया जब उस ने कहा कि Continue Reading..
किस्मत तो लिखी थी मेरी सोने की कलम से, पर इसका क्या करें कि स्याही में ज़हर था..
कहा था ना मैने “सोच लो तुम” जिन्दगी भर रिश्ते निभाना आसान नहीं होता..
जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
तमननाओ की महफिल तो हर कोई सजाता है पर . पुरी उसी की होती जो तकदीर लेकर आता है
Teri Sorat Ko Daikhnay Walay !! Apni Aankhon Se Pyar Kartay Hain……..!!!
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