Ek sukun or ek tum Pta nhi Kahn gum ho jate ho
गलती उनकी नहीं कसूरवार मेरी गरीबी थी दोस्तों, हम अपनी औकात भूलकर बड़े लोगों से दिल लगा बैठे.
सुना है, शहर में ज़ख़्मी दिलो का मेला है, . चलो हम भी कुछ गम अपने पेश करते है.
अरे महोब्बत 💑 तो दिल 💖 से की जाती हैं face 👷 देखकर तो सैटिंग की जाती हैं……….
जारी है मेरी कलम से स्याही का रिसना….. बस तुम दर्द देने का सिलसिला बरकरार रखना !
गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर. ज़िन्दगी ने वफ़ा कि तो कल फिर सिलसिले होंगे.
~Tum Jo Kehte The Acha Haii Zamana Hum Se, Ye Batao K Mila Koi Hamarey Jaisa .. ?
पसंन्द आया तो दिल में , नही तो दिमाग में भी नही ।
मुझे सिर्फ इतना बता दो….इन्तजार करु….. या बदल जाऊ मै भी तुम्हारी तरह….
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