मुझ पर इलज़ाम झूठा है…. _यारों…_ मोहब्बत की नहीं..हो गयी थी….!!
अब इतना भी सादगी का ज़माना नहीं रहा …!! क़े तुम वक़्त गुज़ारो और, हम प्यार समझें,
मैं रोज अपने खून का दिया जलाऊँगा, ऐ इश्क तू एक बार अपनी मजार तो बता
Ajeeb tamasha hua jab wo samne aaye… Har shikayat ne jaise khudkhushi kar li..
अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता
Nafrat Naa karna Mujhse Burra lagge ga.. Bss pyar Se keh Dena Teri Jaroorat Nai Hai.
~ Khushii Walii Raat Neend Nahi Aati Aur Ghum Walii Raat Kaun Sota Haii .. ‘
~अब भी रोज तुम्हारे स्टेट्स पर एक नजर मार लेता हूं,, ये सोच कर शायद तुमने मेरे बारे में भी Continue Reading..
बहुत सोचा कि अब बात ही नही करूँ तुमसे, फिर सोचा झगड़ा किससे करूँगा |
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