मुझे सिर्फ इतना बता दो….इन्तजार करु….. या बदल जाऊ मै भी तुम्हारी तरह….
मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
ख्वाहिशों का झरना एक तुम भी हो मेरी लापता मोहब्बत की मिसाल एक तुम भी हो
ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी
कुछ दस्तकें, नींद तोड़ने आती हैं और कुछ… सिर्फ दिल।
मार्केट में लड़की की स्कूटी ख़राब होने पर, आसपास के लड़कों के अंदर का मैकेनिक जाग जाता है !!
कमज़ोर पड़ गया है मुझसे तुम्हारा ताल्लुक … या कहीं और सिलसिले मजबूत हो गए हैं..
मेरे दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ “साहेब*”, *राख के नीचे ही अक्सर आग दबी होती है*…
खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की … आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है…
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