बस वो मुस्कुराहट ही कहीं खो गई है.!!* *बाकी तो मैं भी बहुत खुश हूँ आजकल.
Kaam aisa karo ki naam ho jaye, ya phir, Naam aisa karo ki sunte he kaam ho jaye…!
रिश्तों के दलदल से, कैसे निकलेंगे जब हर साज़िश के पीछे, अपने निकलेंगे!
लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार भी तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो, अखबार भी तुम्हारा है..!!
काश मेरा घर तेरे घर के करीब होता, बात करना ना सही, देखना तो नसीब होता
~Jab Tak Ziinda Hoon Mere Hoke Jee’Lo, Kuch Hi Diin Ki Baat Haii Phiir Jo Chahe Kar Lena .. ‘
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
ऐ खुदा हिचकियों में कुछ तो फर्क डालना होता अब कैसे पता करूँ कि कौनसी वाली याद कर रही है
जो मेरी आँखो मे पलको पे रहता था, आज काजल लगाया तो बहुत याद आया।
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