रंग कैसा है तुम्हारे प्यार का.. जख़्म दिल के सब गुलाबी हो गए
उसके जाने के बाद मोहब्बत नहीं करते हम किसी से छोटी सी ज़िन्दगी है किस किस को आजमाते रहेंगे
तुम्हे फुरसत हो दुनियां से तो कभी आकर मिलना, हमारे पास सिवा फुरसत के और रह क्या गया है..
आप अगर चाहो तो पूछ लिया करो खैरियत हमारी… कुछ हक़ दिए नहीं जाते ले लिए जाते हैं।।
हमने लिया सिर्फ होंठों से जो तेरा नाम.. दिल होंठो से उलझ पड़ा कि ये सिर्फ मेरा है !!
पर्दा गिरते ही खत्म हो जाते हैं तमाशे सारे …. खूब रोते हैं फिर औरों को हँसाने वाले..
Auron se to pyaar ka rishta bhi nahi tha.. Tum itne badal jaoge socha bi nai tha…?
~Kabhi Munasib Ho To Hum Se Bhi Hum-Kalam Hona Suna Hai Wafa Ki Batain Bohat Karte Ho .. ^
“मर्दाना कमजोरी” के इलाज पर रंगी हुई है शहरों की दीवारें… और लोग कहते हैं कि “औरतें कमज़ोर” हैं…
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