हम बने ही थे तबाह होने के लिए.. तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था.
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
Barish gire na gire sagar chalkta he tum milo na milo zindgi chalti rehti he
हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.
Bahut khaas the kabhi nazro mai kisi ke hum bhi, Magar nazro ke takaze badalne main der kaha lagti hai
ਸੋਹਣੀ ਤਾਂ ਸੱਜਣਾ ਮੈਨੂੰ ਸਾਰੇ ਈ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ …. ਖੁਸ਼ੀ ਤਾਂ ਪਰ ਸਿਰਫ਼ ਤੇਰੇ ਕਹਿਣ ਨਾਲ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਐ ..
मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
Udasiyo ki vajah to bhut mil jati hai… . . . . . . . . . . . . Continue Reading..
जाते उसने पलटकर इतना ही कहा मुझसे मेरी बेवफाई से ही मर जाओगे या मार के जाऊँ”
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *