कट रही है ज़िंदगी रोते हुए, और वो भी तुम्हारे होते हुए…
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
तुमसे ऐसा भी क्या रिश्ता हे? दर्द कोई भी हो.. याद तेरी ही आती हे।
एम्बुलेंस सा हो गया है ये जिस्म, सारा दिन घायल दिल को लिये फिरता है।
एक छोटी पेंसिल एक विशाल याद्दाश्त से कहीं बेहतर है
कहीं ज़िद पूरी, कहीं जरूरत भी अधूरी… कहीं सुगंध भी नहीं, कहीं पूरा जीवन कस्तूरी…!!
कुछ नहीँ था मेरे पास खोने को, जब से मिले हो तुम डर गया हूँ मैँ
एक तो सुकुन और एक तुम, कहाँ रहते हो आजकल मिलते ही नही.
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी, डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए।
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