Ae gham-e-zindagi na ho naraz, Mujhe ko aadat hai muskuraane ki..
अजीब है इन्सान की शख़्सियत यारों, हवस ख़ुद की उठती है “तवायफ़” उसे बोलता है…
बिछड़े थे किस गुरूर से वो भी तो याद कर, आए जो अब आँख में आँसू,फिज़ूल हैं…!!
मेरे विचार से झूठा वादा करने से विनम्र इन्कार करना अच्छा है
चेहरे के रंग को देखकर दोस्त ना बनाना.. दोस्तों .. तन का काला तो चलेगा लेकिन मन का काला नहीं।
किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते..!!
Jo Tu Waada Kar Le, Meri Khamoshi Ko Parhne ka… . . Khilone Ki Tarah Be-Awaaz Hone Ko Tayaar Hoon Continue Reading..
हम सा काहिल न मिलेगा कहीं खुद ख्वाहिशें हमसे तंग सजन
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।
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