किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
इतना शौंक मत रखो इन इश्क की गलियों में जाने का; क़सम से रास्ता जाने का है आने का नहीं!
नींद तो बचपन में आती थी अब तो mobile को rest देने के लिए सो जाते हैं
गलती उनकी नहीं कसूरवार मेरी गरीबी थी दोस्तों, हम अपनी औकात भूलकर बड़े लोगों से दिल लगा बैठे.
भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ, अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती
एक तरफ आँखें है जिनमें नीदें भरी है… दूजी पलकें है जो इंतजार की जिद पे अडी है
Udaasii Kaan Meiin Chup Kay Sey Kehney Lagii, Meiin Thak Gaye Hoon Chalii Jaun Agar Ijazat Ho ..
तू रूठा रूठा सा लगता है कोई तरकीब बता मनाने की मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा तू क़ीमत बता मुस्कुराने Continue Reading..
नींद छीन रखी है उसकी यादो ने मेरी, गिला उसकी दूरी से करूँ या अपनी चाहत से
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *