वो किताबों में दर्ज था ही नहीं, सिखाया जो सबक ज़िंदगी ने !!
में बहुत ज़ालिम हूँ ऐ मेरे दिल….. तुझे हमेशा उसके हवाले किया है, जिसे तेरी कदर ही नहीं…!!
मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता…
ऐब भी बहुत हैं मुझमें और खूबियां भी.. ढूँढने वाले तूं सोच, तुझे चाहिए क्या मुझमे..
Mere Baad Na Aayega Tumhe Chahat Ka Maza Tum Sabse Kehte Phiroge Mujhe Chaho Uski Tarah !!
Kuch jhoothe vaade aur chnd bewfa log,,, Lagta hai aaj fer unki galiyo se guzar aye
मैं मोहब्बत करता हूँ तो टूट कर करता हुँ… ये काम मुझे जरूरत के मुताबिक नहीं आता….
Ek Baar Dard_e_Dil khatam kar Dey……. Ay Mohobaat Halaf dety HAin Dobara Muhabbat Nahi karain Gay,,, .
सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
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