Hindi Stories

इंतज़ार

सपने लुभाते हैं तो रुलाते भी हैं।आनन्द कहाँ है,बस सपने ही तो हैं। जिन आँखों में शबनम थी,चाँद-सितारे थे,आज वही आँखे सुनी-सुनी सी है। चीड़ के नीचे एक लड़का अकेला बैठा है। बार-बार अपनी कलाई पर बंधी घडी की ओर देखता है। इंतज़ार के पल कितने कठिन होते हैं। कभी बेंच पर वह बैठता तो कभी टहलने लगता। ठंडी हवा के झोंकों में वह काँप उठता उसे लगता की मानो वक़्त ठहर सा गया हो। पत्तों की सरसराहट पर वह सतर्क हो जाता,तभी उसने देखा की उसका प्यार उसके सामने है। दोनों बेंच पर बैठ गए। उसने लड़की से कुछ कहना चाहा पर अंदर एक दर्द उमड़ रहा था। लड़की ने उसे समझाना चाहा। वह चुपचाप सुनता रहा। लड़की की आँखों में आंसू की कुछ बूंदें तैर रही थी। वह चली गई शायद दुबारा कभी नहीं मिलने के लिए। लड़का रोज आता। घंटों इंतज़ार कर घर लौट जाता। उसने अपने दर्द को जब्ज़ कर लिया था। श्याद लड़की से रहा नहीं गया। वह आयी ,पूछा ,आखिर कब तक मेरा इंतज़ार करोगे? जिंदगी में कुछ हासिल करना है की नहीं? आखिर कब तक अपनी नाकमाबियों का रोना रोते रहोगे?मैं किसे दोष दूँ। अपने पेरेंट्स को की अपनी किस्मत को? शायद उनकी नसीहत सही थी। वर्तमान कड़ुवाहट लिए था अतीत वर्तमान के सामने बिखर चुका था। कहानी -कवितायें लिखते हो या छोड़ दिया ?लड़का शून्य की तरफ निहार रहा था। फिर उसने अपनी चुप्पी तोड़ी। तुम्हारे लिए एक तोहफा लाया हूँ ,लेने से इंकार मत करना। आसमान में बादलों की लुकाछिपी जारी थी। सर्द हवाएं पत्तों पर फिसल रही थी। वह ढलान पर उतर रहा था। लड़की देखती रही ,उसने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उसने पैकेट खोला। एक किताब थी ,लिखा था ‘-सिर्फ तुम्हरे लिए ‘अप्रतिम प्यार का नायाब भेंट एकाएक मौसम का बदरंग होना उसे तनिक भी नहीं भाया.नीले आसमान में हंस का एक जोड़ा अपनी घोंसला की तरफ लौट रहे थे।


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